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मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है? | Makar Sankranti Kyo Manaya Jata hai?

मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है ? Makar Sankranti kyo manaya jata hai? ( why-makar-sankranti-is-celebrated )




 मकर संक्रांति के त्यौहार को भारत में व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। मकर संक्रांति के त्यौहार को इसलिए इतने व्यापक स्तर पर मनाया जाता है क्योंकि यह एक खास पर्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर्राशि में प्रवेश होते हैं।


मकर संक्रांति क्या है? ( What is Makar Sankranti in Hindi ) makar sankranti kya hai?


सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं. 


सूर्य इस दिन धनु राशि से मकर राशि प्रवेश करते हैं. इस दिन लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पावन नदियों के तट पर स्नान और दान, धर्म करते हैं.


मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है ? Makar Sankranti kyo manaya jata hai? ( why-makar-sankranti-is-celebrated )


मकर संक्रांति के त्यौहार को भारत में व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। मकर संक्रांति के त्यौहार को इसलिए इतने व्यापक स्तर पर मनाया जाता है क्योंकि यह एक खास पर्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने से प्रकृति में एक विशेष प्रकार की रौनकता आ जाती है।


मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति को बहुत स्थानों पर खिचड़ी के रूप में भी जाना जाता है। इसलिए इस दिन कई जगहों पर खिचड़ी खाने का भी प्रचलन है। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग भी लगाया जाता है। इसके अलावे इस दिन तिल, गुड़, रेवड़ी, गजक का प्रसाद भी बांटा जाता है।


शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस दिन गरीबों की बीच काले तिल के बने व्यंजनों का वितरण करने से शनि का कुप्रभाव कम होता है। मकर संक्रांति का यह त्यौहार प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और फसल से जुड़ा है। मकर संक्रांति के दिन से ऋतु में खास परिवर्तन देखने को मिलता है। मकर संक्रांति के दिन मुख्य तौर पर सूर्य की पूजा होती है। इस दिन सूर्य की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि सूर्य को ही प्रकृति का कारक माना जाता है।


मकर संक्रांति का महत्व :-

मकर संक्रांति हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है. इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है. सूर्य का उत्तरायण होना बेहद शुभ माना जाता है.


मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुड़ और तिल लगाकर नर्मदा में स्नान करना लाभदायी होता है. इसके बाद दान संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है. 14 जनवरी ऐसा दिन है, जब धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है. ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है. जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है तब तक उसकी किरणों का असर खराब माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते लगता है तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं.


भारतीयों का प्रमुख पर्व मकर संक्रांति अलग-अलग राज्यों, शहरों और गांवों में वहां की परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है. इसी दिन से अलग-अलग राज्यों में गंगा नदी के किनारे माघ मेला या गंगा स्नान का आयोजन किया जाता है. कुंभ के पहले स्नान की शुरुआत भी इसी दिन से होती है.


मकर संक्रांति त्योहार विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है.



उत्तर प्रदेश : मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व कहा जाता है. सूर्य की पूजा की जाती है. चावल और दाल की खिचड़ी खाई और दान की जाती है.


गुजरात और राजस्थान : उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है. पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है.


आंध्रप्रदेश : संक्रांति के नाम से तीन दिन का पर्व मनाया जाता है.


तमिलनाडु : किसानों का ये प्रमुख पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता है. घी में दाल-चावल की खिचड़ी पकाई और खिलाई जाती है.


महाराष्ट्र : लोग गजक और तिल के लड्डू खाते हैं और एक दूसरे को भेंट देकर शुभकामनाएं देते हैं.


पश्चिम बंगाल : हुगली नदी पर गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता है.


असम : भोगली बिहू के नाम से इस पर्व को मनाया जाता है.


पंजाब : एक दिन पूर्व लोहड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है. धूमधाम के साथ समारोहों का आयोजन किया जाता है.



गुजरात  उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है. पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है.

गुजरात में मकर संक्रांति या उत्तरायण २ दिन तक मनाया जाता है. एक मकर संक्रांति के दिन को और एक उसके बाद बासी मकर संक्रांति या उत्तरायण मनाया जाता है.



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