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इंसान बिना सोए कितने दिन तक रह सकता है ?

 इंसान बिना सोए कितने दिन तक रह सकता है ?

हम इंसान अपनी जिंदगी का १-३ हिसा हम सोते हुए गुजार देते है। न नीद एक ऐसी क्रिया है जो हम सब अपनी जिंदगी की सुरक्षा के सबसे कमजोर अवस्था में होता हैं,फिरभी ये जीव के विकास के लिए बहूत जरूरी है।

लेकीन क्या आपने कभी सोचा है कि यह शारीरिक और मानसिक प्रक्रिया जिसे हम नीद कहते है। के उसके बिना कोई इंसान ७ दिनों तक रह सकता है।

अगर वो बिना सोए रहभी ले तो क्या हालत होगी उस इंसान की आपके साथ कभीना काभी किसी ना किसी वजसे चाहे वो परीक्षा है या जोब का कोइ प्रोजेक्ट या कोइ भी कारण हो सकता है की आप बिना सोए  रात गुजारी हो। लेकीन
 १ हफ्ते तक बीना सोहे रहपाना मुमकिन है कया ?



हमारा दिमाग दिन में बोहोत सारे दृश्य को देखता हे महेसुस कर ता है।लेकीन जब  हम पूरी तरह से सोए हुए होते हैं लेकीन हमारा दिमाग़ जगा हुआ होता है। हमारा दिमाग अपनी जिंदगी में कभी नहीं सोता। लीकन जब हम सोए हुए होते हैं तो हमारा दिमाग़ एक दिलचस्प प्रक्रिया से गुजर ता है। इस समय हमारी सोट टम मेमरी लोग टम मेमरी में बहलती है।

1. पहले दिन -

                 सब कूच अच्छा लगता है,नीद ना मील ने का अलको होल के पेक लगाने जैसा असर  होता है, आपको जान कर हैरानी होगी की अगर आप एक दीन बीना सोए रहते हैं तो आप बोहो त जायदा खुश रहने लगेगे,आप छोटी सी छोटी बातों पर बेवजह  हसने लगोगे।ऐसा दरलसल अपने दिमाग में बड़े डोपामिन लेवल की वाजसे होता हैं और आ च्यरया से जिस का कारण है नीद की कमी

2. दूसरा दिन -

                 शरीर की रक्त कोसी का में थोडी सी   सूजन आना शुरू हो जाता हैं, जिसकी वजह से खुजली या  होने लगती और चिड़चिड़ा पन होने लगता है। ये सब तब रोका ना जाय तो रिद्यय सबंधी बिमारी हो सकती है,और इस वजह से शरीर का बल्ड प्रेशर भी बड़ जता है,नजर में माइक्रो स्कोपियान  टीविएसं होने लगते है।ढिक से इंसान फोकस नहीं कर पाता शरीर के यूमियान  सिस्टम में भी बुरा असर पड़ ने लगता है।
इसी वजह से हमारा शरीर सभी खतरे को बापू लेता है  और उल्टी के रूप में चेतावनी देता है

3. तीसरे दिन -
                  यह अब नींद ना मिलने के तीसरे दिन यहां दूसरों के लिए यहां पता लगाना आसान हो जाता है, कि पीड़ित के साथ गड़बड़ चल रही है, क्योंकि  दिमाग शरीर के साथ कॉर्डिनेट ही नहीं कर पाता और इस वजह से हाथ और आंख ठीक से काम नहीं कर करते और दूसरी तरफ पीड़ित भी बेवजह इमोशनल और जज्बाती होने लगते हैं और उसका फोकस किसी भी चीज पर नहीं पड़ेगा,और बहुत चिड़चिड़ापन महसूस होगी और कोई भी निर्णय लेने में अधिक परेशानी होगी साथ ही साथ इस स्टेज पर आंखें भी सूजन लगती है, और शरीर में बेहद तेज दर्द होने लगता है ,और अब शरीर  की सहनशक्ति  इतनी कम हो गई है कि एक छोटे से छोटा वायरस भी शरीर के लिए घातक साबित हो सकता है , शरीर में  लगी हुई चोट को भी ठीक होने में समय लग जाता है क्योंकि हीलिंग की प्रक्रिया स्लो हो जाती है।

4. चौथे दिन -
                 अब चौथे दिन अजीब चीजें होने लगती है शरीर नींद की कमी को पूरा करने के लिए माइक्रो स्लीप लेने लगता है, माइक्रोस्लीप हमारे शरीर की एक ऐसी अवस्था है ,जिसमें के हमारी आंखें खुली रहती है लेकिन हमारा दिमाग थोड़ी प लों के लिए लिए सो जाता है, इंसान माइक्रोस्ट्रिप का अनुभव कर रहा होता है,उसके वह नहीं पता होता कि उसके साथ ऐसा हो रहा है इस कंडीशन में इंसान की सोने की इच्छा खाने की इच्छा से भी प्रबल हो जाती है इंसान भले ही सोना ना भी चाहे फिर भी दिमाग ख़ुद को सोने के लिए राजी कर लेता है इंसान नींद के लिए एक तरह से तड़पने लगता है।

 5 . पांचवे दिन -

                   पांचवें दिन पीड़ित की गहराई में सोचने की क्षमता यानी  skilll एक तरहसे कम हो जाती हैं, एकाग्रता  बिल्कुल खत्म हो जाती है  और वो छोटे-छोटे न्निन्नय  लेने में भी असमर्थ होता है ,इम्यूनिटी यानी सहनशक्ति ऑल टाइम  लोएस्ट पर ही रहती है, शरीर का दर्द और भी बढ़ता रहता है, और अजीब अजीब दृश्य दिखाई देने लगते हैं, शरीर बीच-बीच में रेप स्लीप या नी रैपिड आई मूवमेंट स्लीप अवस्था में चली जाती है।

     यह रेप स्लीप नींद की वह अवस्था होती है जिसमें इंसान सपने देखता है और इसी समय ब्रेन बहुत एक्टिव होता है ।लेकिन मांसपेशियां ढीली रहती है एक पूरी रात में सोते वक्त हम लगभग 5 बार रेप और नोनरेप सिलप के बीच आते जाते रहते हैं और आप जानते हैं कि रात में हम नॉर्मल 1 से 2 मिनट के लिए हम जागते हैं और मजे की बात तो यह है कि हमें यह पता भी नहीं होता लेकिन कभी-कभी हमें इतना जरूर याद रहता है कि घबराहट हो रही थी  या बाहर शोर शराबा हो रहा था

6 . छ्ठवे दिन -

                  6 दिन तक जगे रहने के बाद इंसान लॉस ऑफ रियलिटी हद तक पहुंच जाता है, इस समय इंसान वास्तविकता से बिल्कुल हटकर सोचने लगेगा और उसका व्यवहार भी किसी भ्रम जी ने जैसा होगा, यह अवस्था भी ऐसी होती है इसमें इंसान पूरी तरह से भ्रम में जी नहीं लगता है।

7. सातवें दिन -
               
 तक पहुंचते-पहुंचते लोंग टर्म मेमोरी को काम करने में दिक्कत होने लगती है और यहां तक के बॉडी में सेलश बनने की प्रक्रिया धीरे-धीरे कम होने लगती है इसलिए जीने इंसोमिनिया यानी ना सोने की बीमारी होती है । वो शरीर से दुबले हो जाते हे,इतने की ऐसा चलता रहे तो उनकी हड़िया भी दिखने लगे ।

अब आपको पता चल  गया होगा कि अगर हमें इंसान ७दिनो तक बीना सोए रहे तो होगा काय।

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